हे राजू चल
नीरू चल
टिनक टिनक
चिनतारा
इमली का बूटा
बेरी का पेड़ इमली खट्टी मीठे बेर
इस जंगल में
हम दो शेर चल घर जळी हो गई देर
इमली का बूटा
...
जिस
दिन से तू रूठ गया
तेरी कसम दिल टूट गया
न जाने कब
रात हुई न जाने कब सवेर
इमली का बूटा
...
रौनक प्यार के नाम की है ये दौलत किस काम की
है
तेरे बिना
हीरे मोती लगते हैं मिट्टी के ढेर
इमली का बूटा
...
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